मैं उसके लंड को मस्ती से अपने मुहँ में लेकर चूस रही थी और फिर मुझसे नहीं रुका गया तो मैं उठी और उसके लंड पर एकदम से बैठकर अपनी चूत को उसके लंड के ऊपर रगड़ने लगी – सुप्रिया

हाय फ्रेंड्स, मेरा नाम सुप्रिया है और मैं मुम्बई में रहने वाली एक पटाखा मराठी लड़की हूँ. दोस्तों मुझे नहीं मालूम, कि आप लोगों ने कभी किसी मराठी लड़की को एकदम नंगा देखा हो या कभी उसकी चूत को सूँघा हो. ज्यादातर महाराष्ट्र की लड़कियों का रंग थोड़ा साँवला सा और थोड़ा गेहुँवा सा होता है, और उनके फिगर का साइज़ एकदम कमाल का होता है, एकदम चिकना जिस्म और उसमें से आती हुई एक मीठी सी खुश्बू. दोस्तों मैं भी कुछ ऐसी ही हूँ. और जब मैं कॉलेज में आई थी तो मेरे कॉलेज की सहेलियों की संगत ने मुझे सेक्स के बारे में सब कुछ सिखा दिया था. और मुझे सेक्सी कहानियाँ पढ़ने और सेक्सी फ़िल्में देखने का बड़ा चस्का लग गया था. कॉलेज में मेरा एक बॉयफ्रेंड भी बन गया था, और हमारे कॉलेज के वार्षिकोत्सव के दौरान उसने मुझे कई बार चोदा भी था. और उसके बाद वह वापस अपने गाँव चला गया था. लेकिन मुझे तो चुदाई का चस्का लग गया था. और मैं घर से बाहर या कॉलेज में किसी और से अपनी चुदाई करवाने से डरती भी थी, क्यूंकी मुझे इस बात का डर लगता था कि कहीं मेरे घर वालों को मेरी इस हरकत के बारे में पता ना चल जाए. और फिर साल भर तो ऐसे ही निकल गया और मैं भी फिर 23 साल की हो गई थी और मैं भी पिछले काफ़ी समय से अपनी ऊँगली से ही अपना काम चला रही थी. लेकिन मैं वास्तव मैं किसी लंड से चुदाई करवाना चाहती थी।
हाँ तो चलिये, मैं आपको सेक्स के उस सागर की तरफ ले चलती हूँ जहाँ पर आपको सेक्स के खूब गोते लगाने को मिलेगें।
दोस्तो, मुझको माफ़ करना मैंने आपको अपने बारे में कुछ नहीं बताया. मेरी लम्बाई 5.6 फुट की है और मैं एक समान शरीर वाली लड़की हूँ. मेरे बब्स 32” के है और एकदम गोरे-गोरे से है और उनके निप्पल भूरे और एकदम सीधे खड़े है. मेरी गांड एकदम उभरी हुई और 36” की है. मैं ज्यादातर जीन्स पेन्ट में ही रहती हूँ. मेरा एक छोटा भाई भी है, जो कि कॉलेज में पढ़ाई कर रहा है. और साथ ही वह पापा के बिजनस में उनकी मदद भी करता है. और वह भी 21 साल का हो चुका है. हमारे यहाँ पढ़ाई से ज्यादा बिजनस को ज्यादा महत्व देते है और मेरा भाई भी एकदम कमाल का बिजनसमैन बन चुका है और वह ज्यादातर पापा के साथ काम में ही लगा रहता था. मेरे हिसाब से तो उसको सेक्स के बारे में ज्यादा कुछ पता नहीं था, और उसके यार-दोस्त भी ना के बराबर ही थे. घर में मैं और वह अभी तक भी एक ही कमरे में सोते है. हमारा कमरा तो एक ही था पर बीच मैं एक लकड़ी की दीवार थी. एक दिन मुझे नींद नहीं आ रही थी और मैंने अपने भाई को आवाज़ लगाई, लेकिन वह उठा ही नहीं, शायद वह बहुत गहरी नींद में था।
और फिर मैंने लकड़ी की दीवार के ऊपर से झाँककर दूसरी तरफ देखा तो, मैं एकदम से चौंक गई थी. वह सोया हुआ था और उसके चेहरे पर एक प्यारी सी हँसी थी और उसका लंड खड़ा हुआ था. और उसके पजामे के उभार को देखकर मुझे अंदाज़ा लग गया था कि उसका लंड तो बहुत बड़ा होगा. और फिर मेरे शरीर में तो एकदम से एक सिरहन सी दौड़ गई थी और अचानक से मेरी चूत की खुजली भी बढ़ गई थी. और साथ ही मेरी बैचनी भी बढ़ने लगी. और फिर मैं नीचे उतरकर हमारे बीच की उस दीवार के दूसरी तरफ चली गई. और मैंने अपने हल्के हाथ से उसके लंड को छूकर देखा तो मेरी हवस का नशा इतना बढ़ चुका था कि मुझे याद ही नहीं रहा कि वह मेरा छोटा भाई है. और फिर मैंने उसके लंड को छुआ और महसूस किया और फिर मैं बाथरूम में भाग गई और फिर वहां जाकर मैंने अपनी चूत में ऊँगली करके अपना सारा पानी निकाल दिया और तब कहीं जाकर मैं शांत हुई. और अब तो मेरा अपने भाई के प्रति नजरिया ही बदल गया था. मैं उसको अपने शरीर के अंगों को दिखाकर उसको उत्तेजित करने की कोशिश करती और उसकी तरफ हँसकर देखती. कभी-कभी तो मैं उसके शरीर को पकड़ लेती और कभी-कभी तो मैं उसके लंड को भी छू लेती थी. और जिससे वह हल्की सी सिसकारी लेकर रह जाता था।
दोस्तों एक दिन रविवार को मेरे मम्मी-पापा को एक प्रोग्राम में जाना था. और घर पर हम दोनों अकेले ही थे. वह अपने कमरे में था और मैं बाथरूम में थी, तो मैंने एकदम से उसे आवाज़ लगाई, भाई जरा इधर आकर मेरी मदद करना. तो वह बाथरूम के गेट के पास आकर मुझसे कहने लगा कि, हाँ बोलो क्या काम है? तो मैंने बाथरूम के दरवाजे की कुण्डी खोलकर उसको बोला कि अन्दर आ जाओ. और फिर जैसे ही वह अन्दर घुसा और उसने देखा कि मैं केवल ब्रा और पैन्टी मैं ही थी और मैं अपनी ब्रा का हुक लगाने की कोशिश कर रही थी, पर वह मुझसे लग ही नहीं रहा था. लेकिन वह मुझे देखकर दरवाज़े पर ही रुक गया, तो मैंने उसकी तरफ देखा तो वह मेरी जाँघो को घूर रहा था. और फिर मैंने जानबूझकर एकदम से अपनी ब्रा को नीचे गिरा दिया और जिससे मेरे बब्स एकदम से आज़ाद हो गये थे. और वह भी अपने लंड को अपने हाथों से छुपाने की कोशिश कर रहा था. जिसको देखकर मेरे चेहरे पर एक हँसी आ गई थी. और फिर मैं उसके पास गई और मैंने उसको बोला. अरे! भाई यह क्या हुआ? लगता है कुछ सूज गया है. और वह नहीं-नहीं कहते हुए पीछे हट रहा था. लेकिन उसकी नज़रें अभी भी मेरे बब्स पर ही थी।
मैंने उसके हाथ को उसके लंड के ऊपर से हटाया और उसके पजामे को एकदम से नीचे कर दिया. और उसका तना हुआ लंड एकदम से मेरे सामने आ गया था, और उसको देखकर मेरे मुहँ से अचानक निकल गया कि अरे…बाप रे… इतना बड़ा… तो वह भी शरमा गया और पीछे मुड़ने लगा तो, मुझे लगा कि कहीं यह मौका मेरे हाथ से ना निकल जाए तो, मैंने एकदम से उसके लंड को पकड़कर उसको अपनी तरफ खींच लिया और उसको अपने आप से चिपका लिया. और फिर मेरा शरीर भी एकदम से गरम होने लगा और मेरे शरीर की गर्मी से उसके लंड की गर्मी भी बढ़ने लगी और वह धीरे-धीरे झटके भी खाने लगा था. वह अपने आप को संभाल नहीं पा रहा था और मुझको अब समझ में आ गया था कि उसको कुछ भी नहीं आता है, और वह सेक्स से बिल्कुल अंजान है. और फिर मैंने उसको अपने आप से अलग किया और उसके सारे कपड़े उतारे और फिर उसके हाथ मैंने अपने बब्स पर रख दिए और उसको मेरे बब्स को दबाने को बोला. तो उसने मेरे बब्स पर उसके हाथ लगते ही एकदम से हटा लिए और वह मुझसे बोला कि यह तो बहुत गरम है. और फिर मैंने अपनी पैन्टी को भी उतार दिया. और फिर उसके लंड को पकड़कर अपनी चूत पर रगड़ने लगी।
उसको तो उस समय जैसे कुछ हो गया था और मुझे भी सेक्स की सनक चढ़ी हुई थी. क्योंकि मैं बहुत समय के बाद किसी लंड का स्वाद ले रही थी. और मुझे थोड़ी बेचैनी भी हो रही थी. और फिर मैंने उसको एकदम से बाथरूम में ही ज़मीन पर लिटाया और उसके लंड को अपने मुहँ में ले लिया, जिससे उसका सारा शरीर ही कांपने लगा था. मैं उसके लंड को मस्ती से अपने मुहँ में लेकर चूस रही थी और फिर मुझसे नहीं रुका गया तो मैं उठी और उसके लंड पर एकदम से बैठकर अपनी चूत को उसके लंड के ऊपर रगड़ने लगी. कसम से दोस्तों उस समय हम दोनों को ही बहुत मज़ा आ रहा था. और फिर कुछ देर मैं नीचे से उसकी गांड ने भी हिलना शुरू कर दिया और 5-7 मिनट में ही वह शांत भी हो गया था, और वह झड़ भी गया था. और मुझे अपनी चूत पर उसके कामरस की चिप-चिप महसूस हो रही थी. और फिर मैंने भी अपनी चूत को उसके लंड पर रगडा और अगले 5-7 मिनट में मैं भी झड़ गई थी. और उस दिन मेरा पानी भी बहुत सारा निकला था. मेरा और उसका पानी एकदूसरे से मिल गया था और वह हम दोनों के शरीर को चिप- चिपा कर रहा था।
और फिर हम दोनों एकसाथ में नहाए और मैंने उसके लंड को हिलाकर उसको एकबार फिर से तैयार किया और फिर से उसके ऊपर बैठकर अपनी चूत को चुदवाया. दोस्तों उस दिन मुझे बहुत मज़ा आया था उसके साथ. और फिर हम दोनों नहाकार तैयार हो गये क्यूंकी हमारे मम्मी-पापा के आने का समय हो गया था. और फिर बाद में मैंने उसे अपने मोबाइल पर बहुत सारी सेक्सी फ़िल्में दिखाई और उसको चुदाई में बहुत अच्छा बना दिया था।
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